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"समय से पहले जवान होती नगरों और महानगरों की बच्चियाँ”

समय से पहले जवान होती नगरों और महानगरों की बच्चियाँ !



समय से पहले जवान होती नगरों और महानगरों की बच्चियाँ !, City girl and teen

"समय से पहले जवान होती नगरों और महानगरों की बच्चियाँ” सुनने में यह बड़ा अटपटा, असभ्य और अजीब लग रहा है,परंतु आज की यही सच्चाई है; आपने अपने आस-पास के बदले सामाजिक माहौल को देखा होगा, बच्चों में आए अचानक बदलाव को अनुभव किया होगा; टेक्नोजी के विकास के साथ-साथ महानगर के बच्चों के जीवन शैली में बड़ा बदलाव आया है। इस वजह से बड़े और मझौले शहर के बच्चे समय से पहले ही मच्योर हो जाते हैं, समय से पहले मेल और फ़ीमेल के निजी अंगो से वाकिफ हो जाते हैं, ऐसा लड़को के अपेक्षा लड़कियों में ज़्यादा देखा देखा गया है । वैसे भी लड़कियां लड़को के अपेक्षा जल्दी बड़ी हो जाती हैं। लेकिन जब से भारत में इंटरनेट क्रांति आई है, इंटरनेट वाला स्मार्ट फोन आया है ऐसा ज़्यादा देखने में आ रहा है ।  

यह इंटरनेट वाला स्मार्ट फोन ही है जो समय से पहले बच्चो से बचपना छीनने का जिम्मेवार है। अब आप ऐसा सोच रहे होंगे कि यह कैसी बेतुकी बात है, ऐसा कैसे हो सकता है ? आपको ऐसा लग रहा होगा कि ब्लोगर का दिमाग खराब हो गया है। 21वीं सदी में 20वीं सदी की बात कर रहा है, आज के जमाने में कैसे टेक्नोलोजी से मुंह मोड़ा जा सकता है? स्मार्ट फोन कैसे किसी का बचपना छीन सकता है ? तो दोस्तों मैं आपको बता दूँ, मैं सीधा-सीधा स्मार्ट फोन को दोषी नहीं ठहरा रहा हूँ और ना ही बच्चों को कुसूरवार मानता हूँ; ज़्यादा गलती आज कल के माँ बाप की है, माँ बाप की लापरवाही और बच्चों की ज़िद की वजह से पैरेंट्स बच्चों के हाथ में मोबाइल थमा देते हैं, कुछ माँ-बाप तो जान-बूझ कर अपने बच्चो के हाथों में मोबाइल यह सोच कर दे देते हैं कि चलो बच्चा कुछ देर मोबाइल से खेलेगा तो घर में शांति रहेगी। माँ-बाप की यह गलती बच्चों पर भारी पड़ती है । दो से पाँच साल के बच्चो के लिए मोबाइल खिलौना हो सकता है परंतु अक्ल से दो-चार हो रहे आठ से ग्यारह साल के बच्चों के हाथ में यह परमाणु बम की तरह है ।

आजकल गूगल प्ले स्टोर पर कई ऐसे एंड्रोएड एप्लीकेशन मिल जाते हैं जो सिर्फ व्यस्कों तक ही सीमित रहना चाहिए, विगो विडियो, टिक-टॉक, क्वाइ, लाइक और भी कई ऐसे एप्लीकेशन है जिसमें अच्छे वीडियोज़ के साथ वल्गर वीडियोज़ भी होते हैं जिसे देखने में बच्चे काफी दिलचस्पी दिखाते हैं; और सिर्फ देखते ही नहीं हैं उन एप्लीकेशन पर अपने मोबाइल से विडियो बना कर अपलोड भी करते हैं, इसके बदले में उन्हें कंपनियों द्वारा कुछ रिवार्ड पॉइंट्स, कमेंट्स, लाइक्स और पैसे भी मिल जाते हैं; इसलिए आज-कल बच्चों में होड़ लगी है की कौन कितनी आकर्षक और सेक्सी विडियो बना सकता है और कितनी likes और comments पा सकता है । इसके अतिरिक्त आज गूगल के सर्च इंजन पर आसानी से सेक्स शिक्षा के साथ साथ सेक्स विडियो भी बच्चे ढूंढ लेते हैं, जिसको देख कर बच्चों के मन-मशतिष्क पर गलत प्रभाव पड़ता है, उनके जहन में (मेल-फ़ीमेल) एक दूसरे के प्रति आकर्षण बढ़ने लगता है, समय से पहले ही दुनिया-दारी का ज्ञान हासिल हो जाता है; उनके अंदर तेजी से हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाता है और समय से पहले ही लड़कियों में पीरियड शुरू हो जाती है। बच्चे मोबाइल को छुपाकर स्कूल ले जाते हैं और समय मिलते हीं मोबाइल की दुनिया में खो जाते हैं ।

वेस्टर्न कंट्रीज़ में ऐसा देखा जाता था कि लड़कियां वयस्क होने से पहले Teen age में ही वर्जिनिटी खो देती हैं, वेस्टर्न कंट्रीज़ के स्कूल में सेक्स एडुकेशन दी जाती है, इसलिए उन देशों में समस्या ज़्यादा नहीं है लेकिन भारत में सेक्स एडुकेशन के अभाव में बच्चे कनफ्यूज़ रहते हैं, उनके अंदर सेक्स के प्रति उत्सुकता इतनी होती है कि खुद को संभाल नहीं पाते और गलत कदम उठा बैठते हैंऐसा अमूमन देखने को मिल रहा है कि शहर की लड़कियाँ समय से पहले अपनी कौमार्यपन खो देती हैं। बड़े शहर की लड़कियां गाँव के लड़कियों के अपेक्षा समय से पहले जवान हो जाती हैं । जो ज्ञान लड़कियों को अमूमन 15-16 साल के बाद आती थी आज वही ज्ञान 11-12 साल की बच्चियों को स्मार्ट फोन के माध्यम से प्राप्त हो जाती है।  यदि आज से 15 साल पहले की पीढ़ी को देखें तो उन्हें सेक्स के बारे में 16-18 साल के बाद ही ज्ञान प्राप्त होती थी लेकिन आज 5 साल पहले यानि 11वीं साल में ही लड़के तथा लड़कियों को सेक्स के बारे में ज्ञान प्राप्त हो जाता है, और इसका कारण है इंटरनेट पर बड़े आसानी से उपलब्ध सेक्स वीडियोज़ है जिसे देख कर बच्चों के दिमाग़ पर बुरा प्रभाव पड़ता है और एक तरह से असामाजिक क्राइम की ओर किशोरावस्था में ही अग्रसर हो जाते है ।

तो क्या हम इस सामाजिक बदलाव और बच्चों में हो रहे परिवर्तन के लिए इंटरनेट वाला स्मार्ट फोन को मान दोषी लें ? नहीं ! ऐसा मेरा मानना कतई नहीं है, प्रगतिशील समाज, देश की अर्थव्यवस्था और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 4G-5G स्पीड का इंटरनेट अतिआवश्यक है और स्मार्ट फोन में इंटरनेट भी बहुत ज़रूरी है क्योंकि इंटरनेट को हम सिर्फ मनोरंजन के लिए, वीडियो देखने का ही इस्तेमाल नहीं करते; बल्कि आज भारत सरकार द्वारा बहुत तरह की सुविधाएं मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराई गई है । सरकार तेजी से देश को कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर ले जा रही है; आज मोबाइल से हम फ़ंड ट्रान्सफर, गॅस बूकिंग, बिल पेमेंट आदि कई काम बिना समय गँवाए बड़ी आसानी से घर बैठे कर लेते हैं। तो इतना तो तय है कि बिना इंटरनेट और स्मार्ट फोन के लाइफ वैसी ही है जैसे बिना पत्नी की शादी-शुदा ज़िंदगी लेकिन समाज में तेजी से फैल रही किशोर और किशोरियों की समस्या को क्या अनदेखा कर दिया जाए ? नहीं ! इसका भी उपाय है- अव्वल तो इंटरनेट वाला स्मार्ट फोन छेः से आठ साल के बच्चों को दें हीं नहीं, दूसरा दूसरा अगर दें तो हमेशा बच्चों पर ध्यान रखें ।
किशोर-किशोरियों में जो सेक्स से संबन्धित समस्या खड़ी हो रही है उसका निदान के लिए सबसे पहले माँ-बाप अपने बच्चों को सेक्स के प्रति सावधान करें कि अर्ली एज सेक्स से क्या क्या नुकसान और समस्याएँ खड़ी हो सकती हैं। स्कूल में भी सेक्स सिक्षा का प्रावधान होना चाहिए ।

 धन्यवाद➤
झरोखा इंडिया by Manoj Kumar

       

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